हम बात करेंगे उस सच्चाई की, जो इंसान को आईना दिखाती है सत्ता के नशे में अक्सर भुला दी जाती है।आज देश में हालात कुछ ऐसे हैं कि एक खास समुदाय को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है। कहीं एनकाउंटर हो रहे हैं, कहीं बुलडोजर चल रहा हैं, झूठे मुकदमे दर्ज कर निर्दोषों को जेल में बंद किया जा रहा है। “आई लव यू मोहम्मद” जैसे पोस्टर और नारों पर लाठीचार्ज हो रहे हैं, लोगों के सर फोड़े जा रहे हैं, और FIR तक दर्ज की जा रही है। सवाल उठता है—क्या पुलिस अपने आदेशों से नहीं, बल्कि राजगद्दी के इशारों से मजबूर है?तानाशाही का यही रूप होता है—जब सत्ता की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति अपने हर शब्द को हुक्म समझता है। मंत्री, अफसर और मीडिया तक उसके सामने सिर झुका देते हैं। जनता डर से चुप रहती है और वह खुद को अजेय मान लेता है।लेकिन जब वही सत्ता हाथ से फिसलती है, तो तानाशाह अकेला पड़ जाता है।जो अफसर कल सलाम ठोकते थे, वे गायब हो जाते हैं।
जो नेता कल चरणस्पर्श करते थे, वे नई सत्ता के आगे नतमस्तक हो जाते हैं।जो मीडिया कल महिमामंडन करता था, वही तंज कसने लगता है।
और तब सच्चाई सामने आती है—कुर्सी के बिना वही तानाशाह सिर्फ एक आम इंसान रह जाता है, जिसके पास न डराने की ताकत होती है, न फैसले थोपने का अधिकार।
सत्ता के नशे में जिसने आवाज़ों को दबाया, घरों पर बुलडोज़र चलवाए, सपनों को कुचला—आख़िर में वही सब उसके सबसे बड़े पछतावे बन जाते हैं।तानाशाह का अंत हमेशा एक सा होता है —कुर्सी पर रहते हुए वो खुद को भगवान समझता है,
लेकिन सत्ता जाते ही उसकी हैसियत ‘रोटलू बाबा’ से ज़्यादा नहीं रह जाती।
ANT News ऑल न्यूज टाइम्स, एडिटर इन चीफ मसूद जावेद क़ादरी की रिपोर्ट।चैनल को सब्सक्राइब, लाइक, शेयर और कमेंट ज़रूर कीजिए।अपना ख्याल रखें — आदाब, नमस्ते।आप देख रहे हैं ANT News आल न्यूज टाइम्स और मैं हूं एंकर वैशाली।
आज हम बात करेंगे उस सच्चाई की, जो इंसान को आईना दिखाती है सत्ता के नशे में अक्सर भुला दी जाती है।आज देश में हालात कुछ ऐसे हैं कि एक खास समुदाय को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है। कहीं एनकाउंटर हो रहे हैं, कहीं बुलडोजर चल रहे हैं, झूठे मुकदमे दर्ज कर निर्दोषों को जेल में बंद किया जा रहा है। “आई लव यू मोहम्मद” जैसे पोस्टर और नारों पर लाठीचार्ज हो रहे हैं, लोगों के सर फोड़े जा रहे हैं, और FIR तक दर्ज की जा रही है। सवाल उठता है—क्या पुलिस अपने आदेशों से नहीं, बल्कि राजगद्दी के इशारों से मजबूर है?तानाशाही का यही रूप होता है—जब सत्ता की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति अपने हर शब्द को हुक्म समझता है। मंत्री, अफसर और मीडिया तक उसके सामने सिर झुका देते हैं। जनता डर से चुप रहती है और वह खुद को अजेय मान लेता है।लेकिन जब वही सत्ता हाथ से फिसलती है, तो तानाशाह अकेला पड़ जाता है।जो अफसर कल सलाम ठोकते थे, वे गायब हो जाते हैं।
जो नेता कल चरणस्पर्श करते थे, वे नई सत्ता के आगे नतमस्तक हो जाते हैं।जो मीडिया कल महिमामंडन करता था, वही तंज कसने लगता है।
और तब सच्चाई सामने आती है—कुर्सी के बिना वही तानाशाह सिर्फ एक आम इंसान रह जाता है, जिसके पास न डराने की ताकत होती है, न फैसले थोपने का अधिकार।
सत्ता के नशे में जिसने आवाज़ों को दबाया, घरों पर बुलडोज़र चलवाए, सपनों को कुचला—आख़िर में वही सब उसके सबसे बड़े पछतावे बन जाते हैं।तानाशाह का अंत हमेशा एक सा होता है —कुर्सी पर रहते हुए वो खुद को भगवान समझता है,
लेकिन सत्ता जाते ही उसकी हैसियत ‘रोटलू बाबा’ से ज़्यादा नहीं रह जाती।
ANT News ऑल न्यूज टाइम्स, एडिटर इन चीफ मसूद जावेद क़ादरी की रिपोर्ट।चैनल को सब्सक्राइब, लाइक, शेयर और कमेंट ज़रूर कीजिए।अपना ख्याल रखें — आदाब, नमस्ते।









